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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन
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श्लोक 2
श्लोक
7.166.2
अथैनं सात्यकि: क्रुद्ध: पञ्चभिर्निशितै: शरै:।
विव्याध हृदये तस्य प्रास्रवत् तस्य शोणितम्॥ २॥
अनुवाद
यह देखकर सात्यकि क्रोधित हो गए और उन्होंने भूरि की छाती में पाँच तीखे बाण मारे, जिससे रक्त की धारा बहने लगी॥2॥
Seeing this Satyaki became furious and he pierced Bhuri's chest with five sharp arrows. A stream of blood started flowing from it.॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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