vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन
»
श्लोक 2
श्लोक
7.166.2
अथैनं सात्यकि: क्रुद्ध: पञ्चभिर्निशितै: शरै:।
विव्याध हृदये तस्य प्रास्रवत् तस्य शोणितम्॥ २॥
अनुवाद
यह देखकर सात्यकि क्रोधित हो गए और उन्होंने भूरि की छाती में पाँच तीखे बाण मारे, जिससे रक्त की धारा बहने लगी॥2॥
Seeing this Satyaki became furious and he pierced Bhuri's chest with five sharp arrows. A stream of blood started flowing from it.॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×