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mahabharat 7.166.19-20h: परन्तु अश्वत्थामा ने मुस्कुराते हुए युद्धस्थल में अपने ऊपर आ रही बाणों की वर्षा को विषैले सर्पों के समान भयंकर बाणों द्वारा शीघ्रतापूर्वक नष्ट कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.166.19-20h 
शरवृष्टिं तु तां प्राप्तां शरैराशीविषोपमै:॥ १९॥
शातयामास समरे तरसा द्रौणिरुत्स्मयन्।
 
 
अनुवाद
परन्तु अश्वत्थामा ने मुस्कुराते हुए युद्धस्थल में अपने ऊपर आ रही बाणों की वर्षा को विषैले सर्पों के समान भयंकर बाणों द्वारा शीघ्रतापूर्वक नष्ट कर दिया।
 
But Ashvatthama, smiling, swiftly destroyed the shower of arrows coming upon him on the battlefield with fierce arrows, like poisonous serpents.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)