श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  7.166.17-18h 
युद्धश्रद्धामहं तेऽद्य विनेष्यामि रणाजिरे।
इत्युक्त्वा क्रोधताम्राक्षो राक्षस: परवीरहा॥ १७॥
द्रौणिमभ्यद्रवत् क्रुद्धो गजेन्द्रमिव केसरी।
 
 
अनुवाद
आज रणभूमि में मैं युद्ध में तुम्हारे विश्वास को चूर-चूर कर दूँगा।’ ऐसा कहकर शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाला, क्रोधित राक्षस घटोत्कच क्रोध से लाल आँखें करके अश्वत्थामा पर उसी प्रकार टूट पड़ा, जैसे सिंह राज हाथी पर टूट पड़ता है॥17 1/2॥
 
Today in the battlefield I will shatter your faith in war.' Having said so, Ghatotkacha, the enraged demon, slayer of enemy warriors, with his eyes turning red with rage, attacked Ashvatthama in the same manner as a lion attacks a king elephant.॥ 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)