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mahabharat 7.166.14: हे नरेश! सात्यकि से 'खड़े रहो, खड़े रहो' कहकर वे उस पर बाणों की वर्षा करने लगे, जैसे मेघ मेरु पर्वत पर जल बरसाता है।   |   mahabharat अध्याय 7.166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.166.14 
तिष्ठ तिष्ठेति चाभाष्य शैनेयं स नराधिप।
अभ्यवर्षच्छरौघेण मेरुं वृष्टॺा यथाम्बुद:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे नरेश! सात्यकि से 'खड़े रहो, खड़े रहो' कहकर वे उस पर बाणों की वर्षा करने लगे, जैसे मेघ मेरु पर्वत पर जल बरसाता है।
 
O lord of men! Saying to Satyaki, 'Stand, stand' he began to shower arrows on him like a cloud pouring water on Mount Meru. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)