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mahabharat 7.165.41: धर्मात्मा युधिष्ठिर को पराजित करने के बाद कृतवर्मा पुनः महान द्रोण के रथ के पहिये की रक्षा करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.165: दोनों सेनाओंका युद्ध और कृतवर्माद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 165: दोनों सेनाओंका युद्ध और कृतवर्माद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.165.41 
कृतवर्मा तु निर्जित्य धर्मात्मानं युधिष्ठिरम्।
पुनर्द्रोणस्य जुगुपे चक्रमेव महात्मन:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा युधिष्ठिर को पराजित करने के बाद कृतवर्मा पुनः महान द्रोण के रथ के पहिये की रक्षा करने लगे।
 
After defeating the righteous Yudhishthira, Kritavarma once again started protecting the chariot wheel of the great Drona.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे युधिष्ठिरापयानं नाम पञ्चषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके अवसरपर युधिष्ठिरका पलायनविषयक एक सौ पैंसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)