श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 165: दोनों सेनाओंका युद्ध और कृतवर्माद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.165.34 
ततस्तु समरे शूरो वृष्णीनां प्रवरो रथी।
व्यश्वसूतरथं चक्रे निमेषार्धाद् युधिष्ठिरम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तब वृष्णिवंश के महारथी कृतवर्मा ने युद्धभूमि में क्षण भर में ही युधिष्ठिर के घोड़े, सारथि और रथ छीन लिये।
 
Then the great warrior of the Vrishni clan, Kritavarman, deprived Yudhishthira of his horses, charioteer and chariot in half a moment in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)