vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 165: दोनों सेनाओंका युद्ध और कृतवर्माद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय
»
श्लोक 33
श्लोक
7.165.33
एतस्मिन्नेव काले तु गृह्य पार्थ: पुनर्धनु:।
हार्दिक्यं छादयामास शरै: संनतपर्वभि:॥ ३३॥
अनुवाद
इस समय युधिष्ठिर ने पुनः अपना धनुष उठाया और कृतवर्मा को मुड़े हुए बाणों से आच्छादित कर दिया।
At this time Yudhishthira once again took up his bow and covered Kritavarma with arrows having bent ends.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×