श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 165: दोनों सेनाओंका युद्ध और कृतवर्माद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.165.32 
सा हेमचित्रा महती पाण्डवेन प्रवेरिता।
निर्भिद्य दक्षिणं बाहुं प्राविशद् धरणीतलम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर द्वारा छोड़ा गया विशाल स्वर्ण बाण कृतवर्मा की दाहिनी भुजा को छेदता हुआ पृथ्वी में समा गया।
 
The huge golden arrow hurled by Yudhishthira, the son of Pandu, pierced through the right arm of Kritavarma and disappeared into the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)