श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 165: दोनों सेनाओंका युद्ध और कृतवर्माद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.165.31 
तस्य शक्तिममेयात्मा पाण्डवो भुजगोपमाम्।
चिक्षेप भरतश्रेष्ठ रथे न्यस्य महद् धनु:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! तब अपार आत्मबल से युक्त पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर ने अपना विशाल धनुष रथ पर चढ़ाकर कृतवर्मा पर सर्प के समान बल चलाया॥31॥
 
Bharatshrestha! Then Pandunandan Yudhishthir, full of immense self-power, placed his huge bow on the chariot and fired a serpent-like force on Kritavarma. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)