श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 165: दोनों सेनाओंका युद्ध और कृतवर्माद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.165.30 
अक्ष्णोर्निमेषमात्रेण सोऽन्यदादाय कार्मुकम्।
विव्याध पाण्डवं षष्टॺा सूतं च नवभि: शरै:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
पलक झपकते ही कृतवर्मा ने दूसरा धनुष उठाया और पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर को साठ बाणों से तथा उनके सारथि को नौ बाणों से घायल कर दिया।
 
In the blink of an eye, Kritavarman took up another bow and wounded Pandu's son Yudhishthira with sixty arrows and his charioteer with nine arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)