श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 165: दोनों सेनाओंका युद्ध और कृतवर्माद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.165.25 
कृतवर्मा तु संक्रुद्धो धर्मपुत्रस्य मारिष।
धनुश्चिच्छेद भल्लेन तं च विव्याध सप्तभि:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
माननीय राजा! तब कृतवर्मा ने अत्यन्त कुपित होकर धर्मपुत्र युधिष्ठिर के धनुष को भाले से काट डाला तथा उसे सात बाणों से भी बींध डाला।
 
Honorable King! Then Kritavarman, extremely enraged, cut the bow of Dharmaputra Yudhishthira with a spear and also pierced him with seven arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)