Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.165.17: इसी प्रकार महान धनुर्धर द्रोणाचार्य, जो युद्धभूमि में शत्रु सैनिकों का संहार कर रहे थे तथा हर्ष और उत्साह से परिपूर्ण थे, उन्हें पांचाल राजकुमार धृष्टद्युम्न ने आगे बढ़ने से रोक दिया। | mahabharat अध्याय 7.165: दोनों सेनाओंका युद्ध और कृतवर्माद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा द्रोणं महेष्वासं निघ्नन्तं शात्रवान् रणे।
धृष्टद्युम्नोऽथ पाञ्चाल्यो हृष्टरूपमवारयत्॥ १७॥
अनुवाद
इसी प्रकार महान धनुर्धर द्रोणाचार्य, जो युद्धभूमि में शत्रु सैनिकों का संहार कर रहे थे तथा हर्ष और उत्साह से परिपूर्ण थे, उन्हें पांचाल राजकुमार धृष्टद्युम्न ने आगे बढ़ने से रोक दिया।
Similarly, the great archer Dronacharya, who was killing enemy soldiers on the battlefield and was full of joy and enthusiasm, was stopped from advancing by the Panchala prince Dhrishtadyumna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥