श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 165: दोनों सेनाओंका युद्ध और कृतवर्माद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.165.10 
शिखण्डिनमथायान्तं रथेन रथिनां वरम्।
कृप: शारद्वतो राजन् वारयामास संयुगे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! रथ पर सवार होकर आते समय रथियों में श्रेष्ठ शिखण्डी को शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य ने युद्धस्थल में रोक लिया॥10॥
 
Nareshwar! While coming in the chariot, Shikhandi, the best among the charioteers, was stopped by Kripacharya, the son of Sharadvan, in the battlefield. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)