श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 165: दोनों सेनाओंका युद्ध और कृतवर्माद्वारा युधिष्ठिरकी पराजय  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  7.165.1-2 
संजय उवाच
वर्तमाने तदा रौद्रे रात्रियुद्धे विशाम्पते।
सर्वभूतक्षयकरे धर्मपुत्रो युधिष्ठिर:॥ १॥
अब्रवीत् पाण्डवांश्चैव पञ्चालांश्चैव सोमकान्।
अभिद्रवत संयात द्रोणमेव जिघांसया॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - जब समस्त प्राणियों का नाश करने वाला वह भयंकर रात्रिकालीन युद्ध आरम्भ हुआ, उस समय धर्मपुत्र युधिष्ठिर ने पाण्डवों, पांचालों और सोमकों से कहा - 'दौड़ो, द्रोणाचार्य को मार डालने के इरादे से उन पर आक्रमण करो।' ॥1-2॥
 
Sanjaya says - When that dreadful night battle which destroyed all beings began, at that time Dharmaputra Yudhishthira said to the Pandavas, Panchalas and Somakas - 'Run, attack Dronacharya with the intention of killing him.' ॥1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)