श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 164: दोनों सेनाओंका घमासान युद्ध और दुर्योधनका द्रोणाचार्यकी रक्षाके लिये सैनिकोंको आदेश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.164.6 
व्यदीप्यन्त दिश: सर्वा: प्रदीपैस्तै: समन्तत:।
वर्षाप्रदोषे खद्योतैर्वृता वृक्षा इवाबभु:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उन दीपों से सभी दिशाएँ प्रकाशित हो रही थीं, मानो वर्षा की संध्या में जुगनुओं से घिरे वृक्ष जगमगा रहे हों।
 
All directions were illuminated by those lamps, as if on a rainy evening, trees surrounded by fireflies were glowing. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)