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श्लोक  7.164.4 
देवगन्धर्वदीपाद्यै: प्रभाभिरधिकोज्ज्वलै:।
विरराज तदा भूमिर्ग्रहैर्द्यौरिव भारत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भारत! उनमें देवताओं और गन्धर्वों के दीपक भी जल रहे थे, जो अपनी विशेष कांति के कारण चमक रहे थे। उनके कारण युद्धभूमि तारों से युक्त आकाश के समान शोभायमान हो रही थी।
 
Bharat! The lamps of the gods and Gandharvas were also burning in them, which were shining brightly due to their special radiance. Due to them, the battlefield was looking beautiful like the sky with stars. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)