श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 164: दोनों सेनाओंका घमासान युद्ध और दुर्योधनका द्रोणाचार्यकी रक्षाके लिये सैनिकोंको आदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.164.2 
ते समेत्य रणे राजन् शस्त्रप्रासासिधारिण:।
परस्परमुदैक्षन्त परस्परकृतागस:॥ २॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वे योद्धा, जो रणभूमि में परस्पर युद्ध कर रहे थे और भाले, तलवार आदि नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए थे तथा अपराधी थे, एक-दूसरे की ओर देखने लगे॥ 2॥
 
Maharaj! Those warriors, who were fighting with each other in the battlefield and were carrying various kinds of weapons, spears and swords etc. and were criminals, started looking at each other.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)