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mahabharat 7.164.19-20: संजय कहते हैं- कुरुनंदन महाराज! युद्ध के इच्छुक द्रोणाचार्य का मत जानकर दुर्योधन ने उस रात अपने वश्ववर्ती बंधुओं से तथा कर्ण, वृषसेन, मद्रराज शल्य, दुर्धर्ष, दीर्घबाहु तथा अपने पीछे आने वाले समस्त लोगों से कहा-   |   mahabharat अध्याय 7.164: दोनों सेनाओंका घमासान युद्ध और दुर्योधनका द्रोणाचार्यकी रक्षाके लिये सैनिकोंको आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 164: दोनों सेनाओंका घमासान युद्ध और दुर्योधनका द्रोणाचार्यकी रक्षाके लिये सैनिकोंको आदेश  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  7.164.19-20 
संजय उवाच
द्रोणस्य मतमाज्ञाय योद्‍धुकामस्य तां निशाम्।
दुर्योधनो महाराज वश्यान् भ्रातॄनुवाच ह॥ १९॥
कर्णं च वृषसेनं च मद्रराजं च कौरव।
दुर्धर्षं दीर्घबाहुं च ये च तेषां पदानुगा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- कुरुनंदन महाराज! युद्ध के इच्छुक द्रोणाचार्य का मत जानकर दुर्योधन ने उस रात अपने वश्ववर्ती बंधुओं से तथा कर्ण, वृषसेन, मद्रराज शल्य, दुर्धर्ष, दीर्घबाहु तथा अपने पीछे आने वाले समस्त लोगों से कहा-
 
Sanjay says- Kurunandan Maharaj! Knowing the opinion of Dronacharya who wanted to fight, Duryodhana said to his Vashvarti brothers that night and to Karna, Vrishasena, Madraraja Salya, Durdharsha, Long-armed and all those who were following him -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)