श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 164: दोनों सेनाओंका घमासान युद्ध और दुर्योधनका द्रोणाचार्यकी रक्षाके लिये सैनिकोंको आदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.164.18 
हतांश्चैव विदीर्णांश्च विप्रकीर्णांश्च शंससि।
रथिनो विरथांश्चैव कृतान् युद्धेषु मामकान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तुम समस्त युद्धों में मेरे पक्ष के सारथिओं को घायल, क्षत-विक्षत, बिखरे हुए और रथहीन बता रहे हो॥ 18॥
 
In all the wars you are describing my side's charioteers as casualties, shattered, scattered and without chariots.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)