Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.164.17: सूत! आप मेरे शत्रुओं को तो अशान्त, अजेय, हर्ष और उत्साह से युक्त तथा युद्ध में शीघ्रता से आगे बढ़ते हुए बताते हैं; परन्तु मेरे पुत्रों की ऐसी स्थिति का वर्णन नहीं करते॥17॥ | mahabharat अध्याय 7.164: दोनों सेनाओंका घमासान युद्ध और दुर्योधनका द्रोणाचार्यकी रक्षाके लिये सैनिकोंको आदेश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अव्यग्रानेव हि परान् कथयस्यपराजितान्।
हृष्टानुदीर्णान् संग्रामे न तथा सूत मामकान्॥ १७॥
अनुवाद
सूत! आप मेरे शत्रुओं को तो अशान्त, अजेय, हर्ष और उत्साह से युक्त तथा युद्ध में शीघ्रता से आगे बढ़ते हुए बताते हैं; परन्तु मेरे पुत्रों की ऐसी स्थिति का वर्णन नहीं करते॥17॥
Suta! You describe my enemies as being restless, undefeated, full of joy and enthusiasm, and advancing swiftly in the battle; but you do not describe the same condition of my sons.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥