श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 164: दोनों सेनाओंका घमासान युद्ध और दुर्योधनका द्रोणाचार्यकी रक्षाके लिये सैनिकोंको आदेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.164.16 
यो ददाह शरैर्द्रोण: पञ्चालानां रथव्रजान्।
धूमकेतुरिव क्रुद्ध: कथं मृत्युमुपेयिवान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
आचार्य द्रोण, जिन्होंने क्रोधी अग्निदेव की तरह अपने बाणों की ज्वाला से पांचाल योद्धाओं के समूहों को जलाकर भस्म कर दिया था, उनकी मृत्यु कैसे हुई?
 
How did Acharya Drona, who, like the wrathful Agnidev (God of Fire), had burned to ashes the groups of Panchala warriors with the flames of his arrows, die?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)