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mahabharat 7.163.18: सबने देखा कि सारी सेना, पैदल सेना द्वारा, हाथों में मशालें और तेल लिए हुए, रात में ऐसे प्रकाशित हो रही थी जैसे आकाश में बादल बिजली की रोशनी से प्रकाशित हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.163: कौरवों और पाण्डवोंकी सेनाओंमें प्रदीपों (मशालों)-का प्रकाश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 163: कौरवों और पाण्डवोंकी सेनाओंमें प्रदीपों (मशालों)-का प्रकाश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.163.18 
सर्वास्तु सेना व्यतिसेव्यमाना:
पदातिभि: पावकतैलहस्तै:।
प्रकाश्यमाना ददृशुर्निशायां
यथान्तरिक्षे जलदास्तडिद्भि:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सबने देखा कि सारी सेना, पैदल सेना द्वारा, हाथों में मशालें और तेल लिए हुए, रात में ऐसे प्रकाशित हो रही थी जैसे आकाश में बादल बिजली की रोशनी से प्रकाशित हो जाते हैं।
 
Everyone saw that the entire army, served by infantry with torches and oil in their hands, was lit up in the night just as the clouds in the sky are lit up by the light of lightning.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)