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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश
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श्लोक 6
श्लोक
7.162.6
विमुञ्चञ्छरवर्षाणि पर्जन्य इव वृष्टिमान्।
छादयामास शैनेयं जलदो भास्करं यथा॥ ६॥
अनुवाद
सोमदत्त ने वर्षा करने वाले मेघ के समान बाणों की वर्षा करके शिनि के पौत्र सात्यकि को उसी प्रकार ढक लिया, जैसे मेघ सूर्य को ढक लेता है।
Showering his arrows like a rain-bearing cloud, Somadatta covered Satyaki, the grandson of Shini, just as a cloud covers the sun.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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