Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.162.54-55: पांडवपुत्र युधिष्ठिर अपने रथ की भीषण गर्जना से पृथ्वी को गुंजायमान कर रहे थे, जैसे वर्षा ऋतु में दसों दिशाओं में गर्जना करते बादल गूँजते हैं। शत्रुसंहारक भीमसेन के पार्श्व की रक्षा का भार उन्होंने अपने ऊपर ले लिया था। उधर, द्रोणाचार्य भी रात्रि में पांडव और पांचाल सैनिकों का संहार करने लगे। | mahabharat अध्याय 7.162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पांडवपुत्र युधिष्ठिर अपने रथ की भीषण गर्जना से पृथ्वी को गुंजायमान कर रहे थे, जैसे वर्षा ऋतु में दसों दिशाओं में गर्जना करते बादल गूँजते हैं। शत्रुसंहारक भीमसेन के पार्श्व की रक्षा का भार उन्होंने अपने ऊपर ले लिया था। उधर, द्रोणाचार्य भी रात्रि में पांडव और पांचाल सैनिकों का संहार करने लगे।
Pandava's son Yudhishthira was making the ground resonate with the heavy roar of his chariot, just as the roaring clouds echo in all the ten directions during the rainy season. He took the responsibility of protecting the flank of Bhimasena, the slayer of enemies. On the other hand, Dronacharya also started killing the Pandava and Panchala soldiers at night.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे द्विषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धविषयक एक सौ बासठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥