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mahabharat 7.162.50: क्योंकि राजा को राजा से ही युद्ध करना चाहिए। जो राजा नहीं है, उसके साथ युद्ध करना उचित नहीं है। इसलिए हे कुन्तीपुत्र! तुम हाथी, घोड़े और रथों की सेना से घिरे हुए वहाँ जाओ।   |   mahabharat अध्याय 7.162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  7.162.50 
राजा राज्ञा हि योद्धव्यो नाराज्ञा युद्धमिष्यते।
तत्र त्वं गच्छ कौन्तेय हस्त्यश्वरथसंवृत:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि राजा को राजा से ही युद्ध करना चाहिए। जो राजा नहीं है, उसके साथ युद्ध करना उचित नहीं है। इसलिए हे कुन्तीपुत्र! तुम हाथी, घोड़े और रथों की सेना से घिरे हुए वहाँ जाओ।
 
Because a king should fight only with a king. It is not desirable to fight with someone who is not a king. Therefore, O son of Kunti, you should go there surrounded by an army of elephants, horses and chariots. 50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)