श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.162.5 
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य सात्वतं रभसं रणे।
सोमदत्तो महाबाहुरसम्भ्रान्तो न्यवर्तत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में तीव्र गति से चलने वाले सात्यकि को अपनी ओर आते देख महाबाहु सोमदत्त बिना किसी भय के उनकी ओर लौट पड़ा।
 
Seeing the swift Satyaki approaching him on the battlefield, the mighty-armed Somadatta turned back towards him without any fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)