श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 46-47
 
 
श्लोक  7.162.46-47 
ततोऽब्रवीद् वासुदेव: कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्॥ ४६॥
युधिष्ठिर महाबाहो यत्त्वां वक्ष्यामि तच्छृणु।
उपारमस्व युद्धे त्वं द्रोणाद् भरतसत्तम॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर वसुदेवनन्दन भगवान श्रीकृष्ण ने कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर से कहा- 'महाबाहु युधिष्ठिर! मैं जो तुमसे कह रहा हूं उसे सुनो. भरतश्रेष्ठ! तुम युद्ध में द्रोणाचार्य से दूर रहो। 46-47॥
 
Thereafter Vasudevanandan Lord Shri Krishna said to Kunti's son Yudhishthir - 'Mighty-armed Yudhishthir! Listen to what I'm telling you. Bharatshrestha! You stay away from Dronacharya in the war. 46-47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)