श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  7.162.45-46h 
चिच्छेद च धनुर्दीर्घं ब्राह्मणस्य च पाण्डव:।
ततोऽन्यद् धनुरादत्त द्रोण: क्षत्रियमर्दन:॥ ४५॥
तदप्यस्य शितैर्भल्लैश्चिच्छेद कुरुपुङ्गव:।
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, पाण्डुपुत्र ने महाबली ब्राह्मण द्रोणाचार्य का विशाल धनुष भी काट डाला। तब क्षत्रियों का अपमान करने वाले द्रोणाचार्य ने दूसरा धनुष हाथ में लिया। किन्तु महाकौरुण युधिष्ठिर ने अपने तीखे बाणों से उसे भी काट डाला।
 
Not only this, the son of Pandu also cut the huge bow of the great Brahmin Dronacharya. Then Dronacharya, who humiliated the Kshatriyas, took another bow in his hand. But the great Kuru Yudhishthira cut that too with his sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)