श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.162.43 
प्रतिलभ्य तत: संज्ञां मुहूर्ताद् द्विजसत्तम:।
क्रोधेन महताऽऽविष्टो वायव्यास्त्रमवासृजत्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् जब वे सचेत हुए, तब दोनों में श्रेष्ठ द्रोण ने अत्यन्त क्रोधपूर्वक वायव्यास्त्र का प्रयोग किया ॥43॥
 
After that, when he became conscious, Drona, the best of the two, in great anger, used Vayavyastra. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)