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mahabharat 7.162.41: तब राजा ने सहस्रों बाणों की वर्षा करके द्रोणाचार्य को उनके घोड़े, सारथि, रथ और ध्वजा सहित घायल कर दिया। यह अद्भुत कार्य था। 41।   |   mahabharat अध्याय 7.162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.162.41 
तत: शरसहस्रेण द्रोणं विव्याध पार्थिव:।
साश्वसूतध्वजरथं तदद्भुतमिवाभवत्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तब राजा ने सहस्रों बाणों की वर्षा करके द्रोणाचार्य को उनके घोड़े, सारथि, रथ और ध्वजा सहित घायल कर दिया। यह अद्भुत कार्य था। 41।
 
Then the king showered thousands of arrows and pierced Dronacharya along with his horse, charioteer, chariot and flag. It was a wonderful deed. 41.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)