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mahabharat 7.162.4: हे राजन! वे मन और वायु के समान वेगवान घोड़े युयुधान को उसी प्रकार ले जाने लगे, जैसे राक्षसों का वध करने के लिए उद्यत हुए देवताओं के राजा इन्द्र को घोड़ों ने ले लिया था।   |   mahabharat अध्याय 7.162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.162.4 
तेऽवहन् युयुधानं तु मनोमारुतरंहस:।
यथेन्द्रं हरयो राजन् पुरा दैत्यवधोद्यतम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! वे मन और वायु के समान वेगवान घोड़े युयुधान को उसी प्रकार ले जाने लगे, जैसे राक्षसों का वध करने के लिए उद्यत हुए देवताओं के राजा इन्द्र को घोड़ों ने ले लिया था।
 
O King! Those horses, as swift as the mind and the wind, began to take Yuyudhaana away in the same manner as the horses had taken away Indra, the king of the gods, who was determined to kill demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)