Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.162.39-40: तब महाबली द्रोणाचार्य, जो अत्यन्त घायल हो गए थे, अपनी भुजाएँ चाटने लगे। उन्होंने युधिष्ठिर का ध्वज और धनुष भी काट डाला। आवश्यकता पड़ने पर शीघ्रता करने वाले महाबली राजा युधिष्ठिर ने युद्धभूमि में धनुष कट जाने पर शीघ्रता से दूसरा प्रबल धनुष हाथ में ले लिया। 39-40।   |   mahabharat अध्याय 7.162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  7.162.39-40 
सोऽतिविद्धो महाबाहु: सृक्किणी परिसंलिहन्।
युधिष्ठिरस्य चिच्छेद ध्वजं कार्मुकमेव च॥ ३९॥
स च्छिन्नधन्वा त्वरितस्त्वराकाले नृपोत्तम:।
अन्यदादत्त वेगेन कार्मुकं समरे दृढम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
तब महाबली द्रोणाचार्य, जो अत्यन्त घायल हो गए थे, अपनी भुजाएँ चाटने लगे। उन्होंने युधिष्ठिर का ध्वज और धनुष भी काट डाला। आवश्यकता पड़ने पर शीघ्रता करने वाले महाबली राजा युधिष्ठिर ने युद्धभूमि में धनुष कट जाने पर शीघ्रता से दूसरा प्रबल धनुष हाथ में ले लिया। 39-40।
 
Then the mighty Dronacharya, who was badly wounded, started licking his arms. He also cut off Yudhishthira's flag and bow. The great king Yudhishthira, who is quick in times of need, quickly took another strong bow in his hand when his bow was cut in the battlefield. 39-40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)