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mahabharat 7.162.31: राजन! तत्पश्चात् सात्वतवंशी सात्यकि ने सोमदत्त पर प्रज्वलित अग्नि के समान एक अत्यन्त भयंकर बाण चलाया, जो सुवर्णमय पंखों वाला तथा शिला पर तीखा किया हुआ था॥31॥   |   mahabharat अध्याय 7.162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.162.31 
तत: शरं महाघोरं ज्वलन्तमिव पावकम्।
मुमोच सात्वतो राजन् स्वर्णपुङ्खं शिलाशितम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् सात्वतवंशी सात्यकि ने सोमदत्त पर प्रज्वलित अग्नि के समान एक अत्यन्त भयंकर बाण चलाया, जो सुवर्णमय पंखों वाला तथा शिला पर तीखा किया हुआ था॥31॥
 
Rajan! After that, Satyaki of Satvatavanshi shot at Somdutt a very dangerous arrow like a blazing fire, having golden wings and sharpened on a rock. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)