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mahabharat 7.162.30: तत्पश्चात् सिंहरूपी सात्यकि ने मुस्कुराते हुए मुड़े हुए मूठ वाले धनुष और बाण से सोमदत्त के सारथि का सिर धड़ से अलग कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.162.30 
सारथेश्च शिर: कायाद् भल्लेन नतपर्वणा।
जहार नरशार्दूल: प्रहसञ्छिनिपुङ्गव:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सिंहरूपी सात्यकि ने मुस्कुराते हुए मुड़े हुए मूठ वाले धनुष और बाण से सोमदत्त के सारथि का सिर धड़ से अलग कर दिया।
 
Thereupon Satyaki, the lion-like man, smiling, severed the head of Somadatta's charioteer from his body with a bow and arrow having a bent handle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)