vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश
»
श्लोक 3
श्लोक
7.162.3
तत: सम्प्रैषयद् यन्ता सैन्धवांस्तान् मनोजवान्।
तुरङ्गमाञ्छङ्खवर्णान् सर्वशब्दातिगान् रणे॥ ३॥
अनुवाद
तत्पश्चात् सारथि ने शंख के समान श्वेत, मन के समान वेगवान, सब शब्दों से परे, सिंधी घोड़ों को युद्धभूमि में ले गया॥3॥
Then the charioteer led the Sindhi horses, white as conch shells and swift as the mind that transcends all words, into the battlefield. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×