श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.162.28 
ततस्तु सात्यकी राजन् सोमदत्तस्य संयुगे।
धनुश्चिच्छेद भल्लेन हस्तावापं च पञ्चभि:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् युद्धस्थल में सात्यकि ने सोमदत्त का धनुष एक फरसे से काट डाला और पाँच बाणों से उसके दस्ताने नष्ट कर दिए॥28॥
 
Rajan! Thereafter, in the battle field, Satyaki cut off Somdutta's bow with a flail and destroyed his gloves with five arrows. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)