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mahabharat 7.162.27: वह लोहे का विशाल घेरा दो टुकड़ों में टूटकर पृथ्वी पर गिर पड़ा, जैसे वज्र से कोई महान पर्वत शिखर टूट गया हो ॥27॥   |   mahabharat अध्याय 7.162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.162.27 
स पपात द्विधा छिन्न आयस: परिघो महान्।
महीधरस्येव महच्छिखरं वज्रदारितम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वह लोहे का विशाल घेरा दो टुकड़ों में टूटकर पृथ्वी पर गिर पड़ा, जैसे वज्र से कोई महान पर्वत शिखर टूट गया हो ॥27॥
 
That great circle of iron broke into two pieces and fell on the earth like a great mountain peak split by a thunderbolt. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)