श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.162.22 
अथान्यद् धनुरादाय सोमदत्तो महारथ:।
सात्यकिं छादयामास शरवृष्ट्या महाबल:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद महारथी सोमदत्त ने दूसरा धनुष उठाया और बाणों की वर्षा से सात्यकि को आच्छादित कर दिया।
 
After this, the great warrior Somadatta took up another bow and covered Satyaki with a shower of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)