श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.162.20 
सात्वतोऽपि रणे क्रुद्ध: सोमदत्तस्य धन्विन:।
धनुश्चिच्छेद भल्लेन क्षुरप्रेण शितेन ह॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब युद्धस्थल में क्रोधित सात्यकि ने क्षुरप्र नामक तीक्ष्ण भाले से धनुर्धर सोमदत्त का धनुष काट डाला।
 
Then Satyaki, enraged on the battle-field, cut the bow of the archer Somadatta with a sharp spear called Kshurapra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)