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mahabharat 7.162.16: और तुरन्त ही उसने उस पर पच्चीस बाणों से आक्रमण कर दिया। सोमदत्त ने, जो आवश्यकता पड़ने पर शीघ्रता से कार्य कर रहा था, पुनः दस बाणों से सात्यकि को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.162.16 
अथैनं पञ्चविंशत्या सायकानां समार्पयत्।
त्वरमाणस्त्वराकाले पुनश्च दशभि: शरै:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
और तुरन्त ही उसने उस पर पच्चीस बाणों से आक्रमण कर दिया। सोमदत्त ने, जो आवश्यकता पड़ने पर शीघ्रता से कार्य कर रहा था, पुनः दस बाणों से सात्यकि को घायल कर दिया।
 
And immediately he attacked him with twenty-five arrows. Somadatta, who acted swiftly on the occasion of need, again wounded Satyaki with ten arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)