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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.162.12 
शरसम्भिन्नगात्रौ तु सर्वत: शकलीकृतौ।
श्वाविधाविव राजेन्द्र दृश्येतां शरविक्षतौ॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उनके शरीर चारों ओर से बाणों से घायल और क्षत-विक्षत हो गए थे, और बाणों से बिंधे हुए जंगली पशुओं के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
O King! Their bodies were wounded and mutilated from all sides by arrows, and looked like those of wild animals pierced by arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)