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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.162.1 
संजय उवाच
सोमदत्तं तु सम्प्रेक्ष्य विधुन्वानं महद् धनु:।
सात्यकि: प्राह यन्तारं सोमदत्ताय मां वह॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: हे राजन! सोमदत्त को अपना विशाल धनुष उठाते देख सात्यकि ने अपने सारथि से कहा, 'मुझे सोमदत्त के पास ले चलो।'
 
Sanjaya says: O King, seeing Somadatta swinging his huge bow, Satyaki said to his charioteer, 'Take me to Somadatta.' 1.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)