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mahabharat 7.161.9-10h: लाल घोड़ों वाले द्रोणाचार्य के रथ के पास 'उसे मार डालो, उस पर निर्भय होकर आक्रमण करो, उसे बाणों से छेद दो, उसके टुकड़े-टुकड़े कर दो' आदि भयंकर शब्द सुनाई दे रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.161: भीमसेन और अर्जुनका आक्रमण और कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 161: भीमसेन और अर्जुनका आक्रमण और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  7.161.9-10h 
हत प्रहरताभीता विध्यत व्यवकृन्तत॥ ९॥
इत्यासीत् तुमुल: शब्द: शोणाश्वस्य रथं प्रति।
 
 
अनुवाद
लाल घोड़ों वाले द्रोणाचार्य के रथ के पास 'उसे मार डालो, उस पर निर्भय होकर आक्रमण करो, उसे बाणों से छेद दो, उसके टुकड़े-टुकड़े कर दो' आदि भयंकर शब्द सुनाई दे रहे थे।
 
Terrifying words like 'Kill him, attack him fearlessly, pierce him with arrows, tear him into pieces' etc., were heard near the chariot of Dronacharya who had red horses. 9 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)