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श्लोक 7.161.19  |
उत्सृज्य शतशो वाहांस्तत्र केचिन्नराधिपा:।
प्राद्रवन्त महाराज भयाविष्टा: समन्तत:॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| महाराज! कुछ राजा, जो सैकड़ों की संख्या में थे, अपने वाहन वहीं छोड़कर भयभीत होकर चारों ओर भाग गए। |
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| Maharaj! Some kings, who were hundreds in number, left their vehicles there and fled in all directions in fear. |
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इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे संकुलयुद्धे एकषष्ट्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १६१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके अवसरपर संकुलयुद्धविषयक एक सौ इकसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६१॥
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