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श्लोक 7.161.18-19h  |
सा पाण्डुपुत्रस्य शरैर्दीर्यमाणा महाचमू:॥ १८॥
तमसा संवृते लोके व्यद्रवत् सर्वतोमुखी। |
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| अनुवाद |
| पाण्डुपुत्र अर्जुन के बाणों से बिंधी हुई वह विशाल सेना उस अन्धकारमय लोक में सर्वत्र भागने लगी ॥18 1/2॥ |
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| That huge army, pierced by the arrows of Pandu's son Arjuna, started running everywhere in that dark world. 18 1/2॥ |
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