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mahabharat 7.161.17-18h: महाराज! द्रोणाचार्य और आपके अपने पुत्र ने उन्हें रोकने का बहुत प्रयत्न किया, परन्तु उस समय आपके सैनिकों को रोका नहीं जा सका।   |   mahabharat अध्याय 7.161: भीमसेन और अर्जुनका आक्रमण और कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 161: भीमसेन और अर्जुनका आक्रमण और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  7.161.17-18h 
द्रोणेन वार्यमाणास्ते स्वयं तव सुतेन च॥ १७॥
नाशक्यन्त महाराज योधा वारयितुुं तदा।
 
 
अनुवाद
महाराज! द्रोणाचार्य और आपके अपने पुत्र ने उन्हें रोकने का बहुत प्रयत्न किया, परन्तु उस समय आपके सैनिकों को रोका नहीं जा सका।
 
Maharaj! Dronacharya and your own son tried hard to stop them, but your soldiers could not be stopped at that time. 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)