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mahabharat 7.161.13-15h: अर्जुन ने द्रोणाचार्य की सेना पर दाहिनी ओर से और भीमसेन ने बाईं ओर से भारी बाणों की वर्षा आरम्भ की। महाराज! उस समय महान पांचाल, सृंजय, मत्स्य और सोमक भी उन दोनों के मार्ग पर चल पड़े।   |   mahabharat अध्याय 7.161: भीमसेन और अर्जुनका आक्रमण और कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 161: भीमसेन और अर्जुनका आक्रमण और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 13-15h
 
 
श्लोक  7.161.13-15h 
बीभत्सुर्दक्षिणं पार्श्वमुत्तरं तु वृकोदर:॥ १३॥
भारद्वाजं शरौघाभ्यां महद्‍भ्यामभ्यवर्षताम्।
तौ तथा सृंजयाश्चैव पञ्चालाश्च महौजस:॥ १४॥
अन्वगच्छन् महाराज मत्स्यैश्च सह सोमकै:।
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने द्रोणाचार्य की सेना पर दाहिनी ओर से और भीमसेन ने बाईं ओर से भारी बाणों की वर्षा आरम्भ की। महाराज! उस समय महान पांचाल, सृंजय, मत्स्य और सोमक भी उन दोनों के मार्ग पर चल पड़े।
 
Arjuna started raining heavy arrows on Dronacharya's army from the right flank and Bhimasena from the left flank. Maharaj! At that time the great Panchalas, Srinjayas, Matsyas and Somakas also followed the path of both of them. 13-14 1/2"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)