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mahabharat 7.161.10-11h: जैसे अजेय महावायु बादलों को छिन्न-भिन्न कर देती है, उसी प्रकार महान् क्रोध में भरे हुए द्रोणाचार्य ने युद्ध में वायुव्यास्त्र द्वारा समस्त शत्रुओं का नाश कर दिया। ॥10 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.161: भीमसेन और अर्जुनका आक्रमण और कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 161: भीमसेन और अर्जुनका आक्रमण और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  7.161.10-11h 
द्रोणस्तु परमक्रुद्धो वायव्यास्त्रेण संयुगे॥ १०॥
व्यधमत् तान् महावायुर्मेघानिव दुरत्यय:।
 
 
अनुवाद
जैसे अजेय महावायु बादलों को छिन्न-भिन्न कर देती है, उसी प्रकार महान् क्रोध में भरे हुए द्रोणाचार्य ने युद्ध में वायुव्यास्त्र द्वारा समस्त शत्रुओं का नाश कर दिया। ॥10 1/2॥
 
Just as the invincible Mahavayu shatters the clouds, similarly Dronacharya, filled with great anger, destroyed all the enemies in the war with the Vayevyastra. ॥10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)