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mahabharat 7.160.47: उस रणभूमि में वे दोनों धनुष लेकर मण्डलाकार नृत्य कर रहे थे। एक-दूसरे को मारने का प्रयत्न करते हुए वे समस्त प्राणियों के लिए भयंकर हो गए थे। 47॥   |   mahabharat अध्याय 7.160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  7.160.47 
नृत्यमानाविव रणे मण्डलीकृतकार्मुकौ।
परस्परवधे यत्तौ सर्वभूतभयङ्करौ॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
उस रणभूमि में वे दोनों धनुष लेकर मण्डलाकार नृत्य कर रहे थे। एक-दूसरे को मारने का प्रयत्न करते हुए वे समस्त प्राणियों के लिए भयंकर हो गए थे। 47॥
 
In that battlefield, both of them were dancing like a circle with their bows. By trying to kill each other, they became terrible for all living beings. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)