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mahabharat 7.160.41-43h: हे राजनश्रेष्ठ! युद्धस्थल में अश्वत्थामा द्वारा आच्छादित होने पर भी सम्पूर्ण पांचाल सेना से घिरे हुए महारथी महाबाहु धृष्टद्युम्न काँपते नहीं थे। उन्होंने अपने बल और पराक्रम का आश्रय लेकर अश्वत्थामा पर नाना प्रकार के बाणों से आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 7.160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 41-43h
 
 
श्लोक  7.160.41-43h 
स च्छाद्यमान: समरे द्रौणिना राजसत्तम॥ ४१॥
सर्वपाञ्चालसेनाभि: संवृतो रथसत्तम:।
नाकम्पत महाबाहु: स्ववीर्यं समुपाश्रित:॥ ४२॥
सायकांश्चैव विविधानश्वत्थाम्नि मुमोच ह।
 
 
अनुवाद
हे राजनश्रेष्ठ! युद्धस्थल में अश्वत्थामा द्वारा आच्छादित होने पर भी सम्पूर्ण पांचाल सेना से घिरे हुए महारथी महाबाहु धृष्टद्युम्न काँपते नहीं थे। उन्होंने अपने बल और पराक्रम का आश्रय लेकर अश्वत्थामा पर नाना प्रकार के बाणों से आक्रमण किया।
 
O best of kings! Even after being covered by Ashwatthama in the battlefield, the great warrior Mahabahu Dhrishtadyumna, surrounded by the entire Panchala army, did not tremble. Taking recourse to his strength and valour, he attacked Ashwatthama with various kinds of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)